लैंगिक असमानता के ऐतिहासिक एवं सामाजिक सन्दर्भ

Authors

  • डॉ0 अनुभा श्रीवास्तव

Abstract

लैंगिक असमानता मानव सभ्यता के विकास के साथ गहराई से जुड़ी एक जटिल सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिघटना है। प्राचीन काल से ही समाजों में स्त्री-पुरुष के मध्य अधिकारों, अवसरों, संसाधनों और सामाजिक भूमिकाओं का असमान वितरण देखने को मिलता है। ऐतिहासिक रूप से पितृसत्तात्मक संरचनाओं, धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और आर्थिक व्यवस्थाओं ने लैंगिक असमानता को संस्थागत रूप प्रदान किया। सामाजिक संदर्भों में यह असमानता शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, राजनीति और निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। आधुनिक काल में संवैधानिक प्रावधानों, महिला आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद लैंगिक असमानता विभिन्न रूपों में विद्यमान है। यह शोध-अध्ययन लैंगिक असमानता के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक कारणों तथा इसके समकालीन प्रभावों का विश्लेषण करता है और यह स्पष्ट करता है कि समानता की स्थापना के लिए संरचनात्मक एवं मानसिक दोनों स्तरों पर परिवर्तन आवश्यक है।
मुख्य शब्द - लैंगिक असमानता, पितृसत्ता, सामाजिक संरचना, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, स्त्री-पुरुष समानता, महिला अधिकार, सामाजिक न्याय

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Published

31-01-2026

How to Cite

डॉ0 अनुभा श्रीवास्तव. (2026). लैंगिक असमानता के ऐतिहासिक एवं सामाजिक सन्दर्भ. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(01), 24–33. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1035

Issue

Section

Research Paper