समकालीन हिंदी कविता में देश बदलने की एक पहल

Authors

  • डॉ0 अजय कुमार

Abstract

“कविता नहीं बदलती देश को
पर कविता बदल देती है सोच को,
और सोच ही तो देश को बदलती है।”
समकालीन हिंदी कविता भारतीय समाज, राजनीति, संस्कृति और मानवीय सरोकारों का दर्पण है। आज की कविता केवल सौंदर्य या भावनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक दस्तावेज के रूप में विकसित हुई है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज के वैश्वीकरण, उदारीकरण और तकनीकी युग तक कविता ने देश में घटित परिवर्तनों को न केवल दर्ज किया है, बल्कि परिवर्तन की दिशा में सक्रिय भूमिका भी निभाई है। देश बदलने की यह पहल कविता के माध्यम से विचारों, संवेदनाओं और संघर्षों की भाषा बनकर सामने आई है। समकालीन कवि समाज में व्याप्त विषमता, अन्याय, भेदभाव और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाते हैं। इस प्रकार, हिंदी कविता आज केवल ‘कविता’ नहीं, बल्कि ‘आंदोलन’ है विचारों का, चेतना का, और परिवर्तन का। वर्तमान समय विज्ञान का युग है। आज आदमी चाँद तक पहुँच चुका है। देश भी अपनी सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ गदल रहा है। आज हमारे पास संसाधान है। आज अनेक क्षेत्रों में अत्म निर्भर हुए है। किसी भी देश का लोक सास्कृतिक परिवेश और लोक रीतियाँ अपने लोक जीवन को समृद्ध करतें हैं। लोक जीवन में आम जन अपने देश का मूल्यांकन अपने आप से करते हैं।
बीज शब्द- राजनीति, समाज, आदमी, संघर्ष, संवेदना, समकालीन।

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Published

31-12-2025

How to Cite

डॉ0 अजय कुमार. (2025). समकालीन हिंदी कविता में देश बदलने की एक पहल. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 90–97. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1038

Issue

Section

Research Paper