बाबा भीमराव अम्बेडकर के विचारों का दलित समाज के उत्थान पर प्रभाव

Authors

  • सुमन

Abstract

इसमें बाबा भीमराव अम्बेडकर द्वारा चलाए गए आंदोलन और उनके दलितों के उत्थान से जुड़े विचार उल्लिखित है। बाबा साहब ने दलितों के मसीहा के रूप में दलित समाज को आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का रास्ता दिखाया संविधान में आरक्षण की व्यवस्था करके उस समुदाय को बिना डर भय के आगे बढ़ने का संदेश दिया। बहुसंख्यक लोग यही जानते है कि बाबा साहब भारतीय संविधान के निर्माता प्रभावशाली वक्ता कानून के जानकारी और एक महान चिंतक थे परंतु ज्यादा लोग यह नहीं जानते हैं कि डॉक्टर अंबेडकर अर्थशास्त्री भी थे और अपने ज्ञान के जरिए उन्होंने अपने समाज को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ाने की महती कोशिश किया उनके त्याग और विश्वास का ही प्रतिफल रहा कि आज दलित समाज के लोग समाज में सम्मान से जीवनयापन करते है। बाबा साहब को विश्वास था कि पढ़ लिख करके ही दलित समाज का उत्थान हो सकता है। इसलिए उन्होंने दलितों को एक समय भोजन भले ही कम करो लेकिन अपनी संतानों को शिक्षा से सुदृढ़ करने का आदेश दिया और उनके अनुयायियों ने उनके मुख से निकली बातों को हृदय में स्थान दिया और शिक्षा से सशक्तिकरण के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़े बाबा साहब ने शिक्षा को आर्थिक शक्ति का आधार माना और सभी प्रकार के दोषों को जीवन से निकल फेंकने का प्रयास किया यहाँ तक कि जिस धर्म में सम्मान न मिले उस धर्म में रहना ही क्यों के प्रश्न का लेकर एक नए धर्म का रास्ता अपना लिया जिसे नवयान या नवबौद्ध कहा गया बाबा भीमराव अंबेडकर ने अपने विचारों और सिद्धांतों द्वारा दलितों को जीवन जीने की सही राह की तरफ अग्रसर किया इसके लिए पूरा दलित समाज सदैव उनका आभारी रहेगा।
शब्द कुंजी- वैदिक धर्म,अस्पृश्यता, तिरस्कार, दलित, पुरुषसूक्त, चतुर्वर्ण व्यवस्था,आरक्षण, स्वराज्य, धम्म, प्रज्ञा, करुणा, धर्मांतरण, बुद्धिवाद, सशक्तिकरण, स्वतंत्रता, सवर्ण।

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Published

31-01-2025

How to Cite

सुमन. (2025). बाबा भीमराव अम्बेडकर के विचारों का दलित समाज के उत्थान पर प्रभाव. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(01), 158–162. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1039

Issue

Section

Research Paper