कुबेरनाथ राय के ललित निबंधों में ‘सस्कृति दृष्टि‘ एक विमर्शात्मक अध्ययन

Authors

  • गौरव यादव

Abstract

कुबेरनाथ राय हिंदी साहित्य के उन विशिष्ट निबंधकारों में हैं, जिन्होंने अपने ललित निबंधों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराइयों में पैठकर उसके विविध आयामों को सामने रखा। उनके निबंध केवल साहित्यिक शिल्प का परिचायक नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और परंपरा के प्रति एक संवेदनशील दृष्टिकोण का भी जीवंत दस्तावेज़ हैं। प्रस्तुत शोधपत्र “कुबेरनाथ राय के ललित निबंधों में ‘संस्कृति दृष्टि’: एक विमर्शात्मक अध्ययन” में उनके निबंधों में निहित संस्कृति दृष्टि का सम्यक विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है। कुबेरनाथ राय के निबंधों में भारतीय संस्कृति का स्वरूप समग्रता में उभरकर सामने आता है। उनके लेखन में संस्कृति केवल भूतकाल की उपलब्धियों का स्मरण नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत परंपरा है, जो समय के साथ स्वयं को ढालते हुए समाज को दिशा देती है। वे भारतीय जीवन के सौंदर्यबोध, नैतिकता, लोकाचार और अध्यात्म को संस्कृति का आधार मानते हैं। उनके निबंधों में भारतीयता की जड़ों से जुड़ने का आग्रह स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं, उसके संकटों और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर बार-बार बल दिया है। यह शोधपत्र कुबेरनाथ राय के ललित निबंधों की सांस्कृतिक चेतना को विमर्श के केंद्र में रखते हुए उनके योगदान का पुनर्मूल्यांकन करने का प्रयास करता है और उनके निबंधों की समकालीन प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।
मुख्य शब्द: कुबेरनाथ राय, ललित निबंध, संस्कृति दृष्टि, भारतीयता, सांस्कृतिक विमर्श।

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Published

30-09-2025

How to Cite

गौरव यादव. (2025). कुबेरनाथ राय के ललित निबंधों में ‘सस्कृति दृष्टि‘ एक विमर्शात्मक अध्ययन. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(09), 120–127. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1062

Issue

Section

Research Paper