प्राथमिक शिक्षा के सन्दर्भ में जीवन मूल्य
Abstract
सभ्य जगत की भव्य एवं आकर्षक दिखने वाली समस्त वस्तुएँ शिक्षा की ही देन है। शिक्षा ही सुसंस्कृत मानव को मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांसरिक संतुष्टि प्रदान करती है। मानव की उन्नति एवं सभ्यता की प्रगति का यही एक मात्र साधन है। शिक्षा का प्रादुर्भाव मानवीय चेतना के आरम्भ से ही होता है। चेतन अवस्था प्राप्त करने के समय से ही मानव अपनी संतति को शिक्षा प्रदान करता आया है और इसके इतिहास का आरम्भ भी यहीं से समझना चाहिए। शिक्षा प्राणिमात्र की एक सहज क्रिया है। यह क्रिया मानव जाति की ही नहीं, व्यापक रूप से जीव मात्र पशु-पक्षी इत्यादि की है। यही जीवों के अस्तित्व में सहायक है। यह शिक्षा की ही विशेषता है कि जीवन के सामान्य व्यवहारों में समान होने पर भी मनुष्य विवेकशील प्राणी के रूप में अन्य समस्त प्राणियों से विशिष्ट है, इसीलिए सर्वोत्कृष्ट प्राणी है। शिक्षा अपने परिष्कृत एवं शुद्ध रूप में मानव को विवेकशील बनाती है।
संकेत शब्दरू- प्राथमिक शिक्षा, जीवन मूल्य।
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