आधुनिक भारत के निर्मांण में आर्यसमाज एवं ब्रहमसमाज की महती भूमिका: एक अध्ययन

Authors

  • डा0 कल्पना गुप्ता एवं अनुष्का तिवारी

Abstract

आधुनिक भारत का निर्मांण 19 वीं शताब्दी में आरंभ हुआ। जब समाज में नए विचारों, सुधार आंदोलनो और राष्ट्रीय चेतना का उदय हुआ। अंग्रेजी शासन के समय भारत सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ था। अंधविश्वास, जातिवाद, महिला उत्पीड़न, अस्पृश्यता और रूढ़िवादी परंपराओं ने समाज को जकड़ रखा था। इन आंदोलनों ने समाज में नई चेतना, समानता, शिक्षा और धार्मिक सुधारों की नींव रखी। इनमें ब्रहम समाज और आर्य समाज का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। स्वामी दयानंद सरस्वती व राजाराममोहन राय का समाज निर्मांण का मुख्य उद्देश्य भारतीय सभ्यता व संस्कृति का विकास करना तथा समाज व हिन्दू धर्म में फैली कुरीतियों को दूर करना था। आर्यसमाज व ब्रहम समाज ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में भी अपनी अह्म भूमिका निभाई। इन समाज के माध्यम से दिये गये संदेशों द्वारा भारतीय जनता में स्वराज तथा निज देश की भावना घर कर गई और लोग जोश से भरकर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद गये। यह अध्ययन आधुनिक भारत में उनके द्वारा दिये गये संदेशों एवं समाज सुधारों को वर्णित कर विकसित राष्ट्र के निर्माण में महती भूमिका निभाने का एक लघु प्रयास है।
शब्द कुॅजी- आर्यसमाज का उद्देश्य एवं योगदान, ब्रहम समाज का उद्देश्य एवं योगदान, दोनो समाजों का सामाजिक प्रभाव, निष्कर्ष

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Published

30-11-2025

How to Cite

डा0 कल्पना गुप्ता एवं अनुष्का तिवारी. (2025). आधुनिक भारत के निर्मांण में आर्यसमाज एवं ब्रहमसमाज की महती भूमिका: एक अध्ययन. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(11), 154–155. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1103

Issue

Section

Research Paper