सतत विकास एवं खाद्य सुरक्षा: भारत के सन्दर्भ में
Abstract
सतत् विकास एवं खाद्य सुरक्षा मानव अस्तित्व एवं सामाजिक प्रगति के दो आधार स्तम्भ हैं। भारत जैसे देश में, जहाँ कि कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है और लगभग आधी से अधिक आबादी लगभग कृषि पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। वहाँ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पर्यावरणीय सन्तुलन बनाये रखना अत्यन्त चुनौतीपूर्ण कार्य है। प्रस्तुत शोध पत्र्ा भारत के सन्दर्भ में सतत् विकास की अवधारणा का विश्ल्ोषण करता है तथा इसे खाद्य सुरक्षा से जोड़कर सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय दृष्टियों से विवेचन करता है। इसमें भारत सरकार की प्रमुख नीतियों--राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, प्रधानमंत्र्ाी किसान सम्मान निधि, एवं नीति आयोग के सतत् विकास लक्ष्य सूचकांक का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन द्वैतीयक आँकड़ों (थ्।व्ए छप्ज्प् ।ंलवहए कृषि मंत्र्ाालय आदि) पर आधारित वर्णनात्मक एवं विश्ल्ोषणात्मक विधि से किया गया है। इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने खाद्य उपलब्धता एवं आत्मनिर्भरता के क्ष्ोत्र्ा में उल्ल्ोखनीय प्रगति की है, परन्तु जलवाुय परिवर्तन, भूमि-क्षरण व निर्धनता जैसी गम्भीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
प्रमुख शब्द: सतत् विकास, खाद्य सुरक्षा, कृषि, सतत् विकास लक्ष्य, नीति आयोग, पर्यावरण।
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