पारदर्शिता और मौलिक अधिकार: सुशासन के लिए तकनीकी नवाचार की भूमिका

Authors

  • जय प्रकाश मिश्रा

Abstract

आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता, मौलिक अधिकारों की रक्षा और सुशासन की अवधारणा परस्पर अविभाज्य तत्व हैं। पारदर्शिता प्रशासनिक प्रक्रियाओं को नागरिकों के लिए खुला और सुलभ बनाती है, जबकि मौलिक अधिकार शासन की सीमाएँ निर्धारित कर नागरिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। 21वीं सदी में तकनीकी नवाचार - विशेषकर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस, और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इन दोनों उद्देश्यों को एक नए आयाम में जोड़ दिया है। भारत में ‘‘डिजिटल इंडिया’’, ‘‘ई-गवर्नेंस’’ और त्ज्प्.2005 जैसी पहलों ने शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया है। यह शोधलेख गंभीर मीमांसा करता है कि तकनीकी नवाचार किस प्रकार पारदर्शिता और मौलिक अधिकारों को सुदृढ़ कर सुशासन की दिशा में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, यह अध्ययन डिजिटल असमानता, डेटा सुरक्षा, निजता और प्रशासनिक संरचना जैसी चुनौतियों की भी समीक्षा करता है। लेख का निष्कर्ष यह स्थापित करता है कि तकनीकी नवाचार तभी वास्तविक सुशासन को सशक्त बना सकते हैं जब वे पारदर्शिता के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों की गरिमा और निजता की रक्षा सुनिश्चित करें। इस प्रकार, तकनीक और नैतिक प्रशासन का संतुलित समन्वय ही सशक्त लोकतंत्र और सुशासन की कुंजी है।
मुख्य २ाब्द- पारदर्शिता, मौलिक अधिकार, सुशासन, तकनीकी नवाचार, ई-गवर्नेंस, डिजिटल जवाबदेही, सूचना का अधिकार, डेटा संरक्षण

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Published

31-12-2025

How to Cite

जय प्रकाश मिश्रा. (2025). पारदर्शिता और मौलिक अधिकार: सुशासन के लिए तकनीकी नवाचार की भूमिका. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 119–125. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1110

Issue

Section

Research Paper