कृत्रिम-बुद्धिमत्ता और विकसित भारत: इतिहास, संभावनाएँ व चुनौतियाँ

Authors

  • डॉ. संजय कुमार सिंह

Abstract

कृत्रिम बुद्धिमत्ता 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जो वैश्विक स्तर पर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संरचनाओं को पुनर्परिभाषित कर रही है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता न केवल तकनीकी उन्नति का माध्यम है, बल्कि विकसित भारत / 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक सशक्त उपकरण भी है। इस शोध पत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण करते हुए इसके प्रारंभिक चरणों से लेकर आधुनिक मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग तक की यात्रा का अध्ययन किया गया है। साथ ही, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान उपयोग जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन और उद्योग की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से उत्पादकता वृद्धि, स्मार्ट गवर्नेंस, डिजिटल समावेशन और रोजगार सृजन के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। किन्तु इसके साथ-साथ कई चुनौतियाँ भी सामने आती हैं, जैसे डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, रोजगार का विस्थापन, नैतिक प्रश्न और डिजिटल विभाजन। यह अध्ययन निष्कर्ष रूप में यह दर्शाता है कि यदि भारत संतुलित नीति, मजबूत नियामक ढाँचा, कौशल विकास और नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सिद्धांतों को अपनाता है, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित भारत के निर्माण में एक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
मुख्य शब्द- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विकसित भारत, डिजिटल अर्थव्यवस्था, मशीन लर्निंग, स्मार्ट गवर्नेंस, रोजगार और कौशल विकास, डेटा गोपनीयता

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Published

31-12-2025

How to Cite

डॉ. संजय कुमार सिंह. (2025). कृत्रिम-बुद्धिमत्ता और विकसित भारत: इतिहास, संभावनाएँ व चुनौतियाँ. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 148–153. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1113

Issue

Section

Research Paper