सशक्त एवं आत्मनिर्भर महिलाओं की भूमिका विकसित भारत @ 2047 के संदर्भ में

Authors

  • अवधेश कुमार, प्रो0 (डॉ0) राजीव पाण्डेय

Abstract

भारत ने वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिस मंे चार प्रमुख स्तम्भ गरीब, युवा, महिलाएं और किसान को सशक्त बनाना आवश्यक माना गया है। इन चारों में ‘‘महिलाएं’’ राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी के रूप में उभर रही है विकसित भारत व 2047 के अनुसार, महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और सतत विकास का आधार भी है। भारत सरकार द्वारा लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। इस योजन के अन्तर्गत महिलाओं को रोजगार, सम्मानजनक आय, सामाजिक सुरक्षा तथा निर्णय-निर्माण में भागीदारी के अवसर प्राप्त हुए है। इससे ग्रामीण समाज में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सशक्तिकरण और लैगिक समानता के दिशा में ठोस प्रगति हुई है। विकसित भारत के निर्माण हेतु महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना देने के लिए आवश्यक है कि मनरेगा जैसी जन-केन्द्रित योजनाआंे को और अधिक महिला उन्मुख बनाया जाए, जिससे वे राष्ट्र की आर्थिक धारा में समान रूप से योगदान दे सके।
मुख्य शब्द- विकसित भारत व 2047, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर, मनरेेगा, ग्रामीण विकास, महिला-भागीदारी

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Published

31-12-2025

How to Cite

अवधेश कुमार, प्रो0 (डॉ0) राजीव पाण्डेय. (2025). सशक्त एवं आत्मनिर्भर महिलाओं की भूमिका विकसित भारत @ 2047 के संदर्भ में. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 164–170. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1115

Issue

Section

Research Paper