वैश्विक मंच पर भारत की छवि-निर्माण में स्वामी विवेकानंद का योगदान

Authors

  • ज्योति मिश्रा, डॉ0 अनुभा श्रीवास्तव

Abstract

स्वामी विवेकानंद भारतीय पुनर्जागरण और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के ऐसे महान प्रतीक हैं जिन्होंने भारत को आध्यात्मिकता, नैतिकता और मानवता के वैश्विक प्रतीक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने पश्चिमी सभ्यता के भौतिकवाद के बीच आत्मिक चेतना का संदेश दिया और भारतीय संस्कृति की गहराई को वैज्ञानिक, तार्किक और सार्वभौमिक रूप में प्रस्तुत किया। 1893 की शिकागो धर्म संसद में उनके भाषण ने भारत की छवि को एक ही झटके में परिवर्तित कर दिया, उपनिवेशित, कमजोर और अंधविश्वासी देश की जगह भारत विश्व के “ज्ञान गुरु” के रूप में उभरा। इस शोध-पत्र में विवेकानंद के विचारों, भाषणों, यात्राओं, और संस्थागत कार्यों के माध्यम से यह विश्लेषित किया गया है कि उन्होंने भारत की छवि को कैसे पुनर्निर्मित किया और किस प्रकार उनका यह दृष्टिकोण आज की भारतीय विदेश नीति और सांस्कृतिक कूटनीति में भी जीवित है।
मुख्य शब्दः स्वामी विवेकानंद, वैश्विक छवि, अध्यात्म, राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति

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Published

31-01-2026

How to Cite

ज्योति मिश्रा, डॉ0 अनुभा श्रीवास्तव. (2026). वैश्विक मंच पर भारत की छवि-निर्माण में स्वामी विवेकानंद का योगदान. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(01), 146–151. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1129

Issue

Section

Research Paper