कितने पाकिस्तान में भारत विभाजन का यथार्थ’
Abstract
भारत के विभाजन (1947) ने उपमहाद्वीप के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को गहराई से प्रभावित किया। “कितने पाकिस्तान” शीर्षक, जो प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर के उपन्यास से प्रेरित है, विभाजन के बहुआयामी यथार्थ को उजागर करता है। यह अध्ययन विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साम्प्रदायिक तनाव, औपनिवेशिक नीतियों तथा सत्ता-हस्तांतरण की जटिलताओं का विश्लेषण करता है। विभाजन के परिणामस्वरूप उत्पन्न हिंसा, विस्थापन, मानवीय त्रासदी तथा सांस्कृतिक विघटन ने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
यह शोध “कितने पाकिस्तान” की अवधारणा के माध्यम से यह दर्शाता है कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर भी समाज को विभाजित कर गया। साहित्य, विशेषकर उपन्यास, इस त्रासदी को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे इतिहास के सूखे तथ्यों के पीछे छिपी मानवीय संवेदनाएँ उजागर होती हैं। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि विभाजन का यथार्थ आज भी साम्प्रदायिकता, पहचान संकट और सामाजिक असमानताओं के रूप में विद्यमान है, जो समकालीन भारतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण चिंतन का विषय है।
मुख्य बिन्दु - भारत विभाजन, कितने पाकिस्तान, साम्प्रदायिकता, विस्थापन, मानवीय त्रासदी, सांस्कृतिक विघटन, पहचान संकट, उपन्यास साहित्य
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