मूक बधिर बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा एवं प्रशिक्षण का महत्व

Authors

  • नैना शुक्ला

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र मूक बधिर बच्चो द्वारा प्रयोग कि जाने वाली सांकेतिक भाषा पर आधारित है। सांकेतिक भाषा में, हस्त . संकेत प्रयुक्त किये जाते हैं । मूक बधिर बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा एक महत्वपूर्ण संचार साधन है, जो उन्हे विचारो और भावनाओ को व्यक्त करने मे मदद करता है। सांकेतिक भाषा मूक बधिर बच्चो को अपने परिवार, समुदाय और समाज के साथ जुडने मे मदद करती है, जिससे उनका सामाजिक और शैक्षिक विकास होता है। कानपुर नगर मे मूक बधिर बच्चो के लिए सांकेतिक भाषा का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह उन्हे, अपने अधिकारो और आवश्यकताओ को व्यक्त करने से मदद करता है। सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण मूक बधिर बच्चो को आत्मनिर्भर एव आत्मविश्वासी बनाने मेे मदद करता है, जिससे वे अपने जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते है। इस शोध पत्र के माध्यम से हम मूक बधिर बच्चो के लिए सांकेतिक भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। और कानपुर नगर में इसके कार्यान्वयन की स्थिति का विश्लेषण करेंगे । हम यह भी देखेगे के कैसे साकेंतिक भाषा मूक बधिर बच्चों के जीवन को बेहतर बना सकती है, और उन्हे समाज मे शामिल होने में मदद कर सकती है। इस शोध पत्र के लिए 50 उत्तरदाताओं का चयन किया गया है एवं शोध की सुगमता को ध्यान मे रखते हुए उद्देश्यपूर्ण एवं स्नोबॉल सेम्पलिंग का चुनाव किया गया है। इस शोध पत्र के माध्यम से सांकेंतिक भाषा का मूक बधिर बच्चो पर क्या प्रभाव पड़ता है इस पर विचाराधीन प्रकाश डाला गया।
कीवर्ड -
1) सांकेंतिक भाषा - चेहरे के हाव भाव की भाषा एवं हाथों के इशारों
2) स्पीच थेरपी - बोलने का तरीका
3) मूक बधिर - बोलने व सुनने में असमर्थ
4) पुनर्वासन - फिर से बसाने की क्रिया

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Published

31-03-2026

How to Cite

नैना शुक्ला. (2026). मूक बधिर बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा एवं प्रशिक्षण का महत्व. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(03), 92–96. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1144

Issue

Section

Research Paper