डॉ. भीमराव अंबेडकर और नारी शिक्षा: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • अखिलेश कुमार , डॉ0 स्मिता सिंह

Abstract

शिक्षा मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रभावी साधन है, जो व्यक्ति के बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी समाज की प्रगति उसके नागरिकों के शिक्षा स्तर पर निर्भर करती है, और इस संदर्भ में नारी शिक्षा विशेष महत्व रखती है। नारी शिक्षा न केवल महिलाओं के व्यक्तिगत विकास का माध्यम है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला भी है। एक शिक्षित महिला अपने परिवार को शिक्षित, जागरूक और सशक्त बनाती है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। भारतीय समाज में ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से शिक्षा से वंचित रखा गया।
पितृसत्तात्मक व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियाँ, लैंगिक भेदभाव और संसाधनों की कमी के कारण महिलाओं की शैक्षिक स्थिति लंबे समय तक कमजोर रही। इस स्थिति को सुधारने के लिए अनेक समाज सुधारकों ने प्रयास किए, जिनमें डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन, समानता और न्याय स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना। उनका मानना था कि शिक्षा महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाती है तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग करती है।
डॉ. आंबेडकर ने महिलाओं को समाज का समान और महत्वपूर्ण अंग मानते हुए उनके शैक्षिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों की वकालत की। उन्होंने भारतीय संविधान में समानता, स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार से संबंधित प्रावधानों के माध्यम से महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब तक महिलाओं को शिक्षा प्राप्त नहीं होगी, तब तक समाज में वास्तविक समानता और सामाजिक न्याय की स्थापना संभव नहीं है।
यह शोध-पत्र डॉ. आंबेडकर के नारी शिक्षा संबंधी विचारों, उनके योगदान तथा महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण करता है। यह अध्ययन ऐतिहासिक, सामाजिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से उनके विचारों की प्रासंगिकता को स्पष्ट करता है तथा यह दर्शाता है कि नारी शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का एक अनिवार्य साधन है। वर्तमान समय में भी उनके विचार महिला शिक्षा के प्रसार और लैंगिक समानता की स्थापना के लिए अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं।
मुख्य शब्द: नारी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, समानता, आंबेडकर, शिक्षा दर्शन

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Published

31-03-2026

How to Cite

अखिलेश कुमार , डॉ0 स्मिता सिंह. (2026). डॉ. भीमराव अंबेडकर और नारी शिक्षा: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(03), 200–208. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1160

Issue

Section

Research Paper