सोशल मीडिया का युवाओं के व्यवहार पर प्रभावः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
Abstract
आज के बदलते युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है बदलते समय के साथ सोशल मीडिया का उपयोग भी बढते जा रहे है, और इसका सबसे अधिक प्रभाव देश के युवाओं पर देखने को मिलता है प्देजंहतंउएथ्ंबमइववाएॅींजेंचचएज्मसमहतंउ और ज्ूपजजमत जैसेेेे प्लेटफॉर्म ने आपसी संपर्क, संचार, सूचना प्राप्ति, व्यवसाय और शि़क्षा को बहुत प्रभावित किया है। इससे लोगों से जुडना, जानकारी प्राप्त करना और जानकारी साझा करना काफी आसान हो गया है। यह शोध पत्र समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से सोशल मीडिया के प्रभाव से युवाओं के व्यवहार में परिवर्तन को उजागर करता है। इसमे इसके नाकारात्मक और साकारात्मक दोनों ही पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। साकारात्कमक प्रभावों में सोशल मिडिया के द्वारा किसी भी चीज की जानकारी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। विचारों का आदान प्रदान कर सकते है घर बैठे कई कार्य कर सकते है। सोशल मीडिया हमारे जीवन को काफी आसान कर दिया है। वहीं दूसरी ओर इसके नाकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलते है इसका अत्यधिक प्रयोग चिंता, अकेलापन का कारण बन सकता है और यह युवाओं के विचारों और भावनाओं को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
यह अध्ययन मुख्य रूप से स्वास्थय, शिक्षा, समाज और संस्कृति पर सोशल मीडिया के प्रभावों को समझने का प्रयास करता है। साथ ही यह युवाओं के भावनाओं, विचारों और जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है। यह भी बताया गया है। अंततः यही निष्कर्ष निकलता है। सोशल मीडिया जिसका सही उपयोग हमारे जीवन को सरल और आसान बना देता है और इसका गलत प्रयोग नाकारात्मक प्रभावों को बढावा देता है। इसलिए इसका सही उपयोग करने के लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है ताकि इसके नाकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
मुख्य शब्द- सोशल मीडिया, युवा व्यवहार, सामाजशास्त्र, डिजिटल संस्कृति, मानसिक स्वास्थय
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