गुप्तकालीन चित्रकलाः सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और कलात्मक विकास
Abstract
भारतीय कला इतिहास में गुप्तकाल को सांस्कृतिक और कलात्मक उत्कर्ष का युग माना जाता है। इस काल में चित्रकला ने अत्यंत परिष्कृत एवं परिपक्व स्वरूप धारण किया। गुप्तकालीन चित्रकला केवल सौंदर्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें धार्मिक चेतना, सामाजिक जीवन, मानवीय भावनाएँ तथा आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। विशेष रूप से अजंता की गुफाओं में निर्मित चित्र इस काल की चित्रकला की उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। इन चित्रों में बौद्ध धर्म, जातक कथाओं, राजदरबार, नृत्य-संगीत, स्त्री सौंदर्य, प्रकृति और मानवीय संबंधों का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण मिलता है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य गुप्तकालीन चित्रकला की उत्पत्ति, विकास, प्रमुख विशेषताएँ, तकनीक, विषय-वस्तु, धार्मिक प्रभाव तथा सांस्कृतिक महत्ता का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। यह शोध यह स्पष्ट करता है कि गुप्तकालीन चित्रकला भारतीय सभ्यता के सौंदर्यबोध और आध्यात्मिक चिंतन का श्रेष्ठ उदाहरण है।
मुख्य शब्द- गुप्तकाल, चित्रकला, अजंता गुफाएँ, भारतीय कला, बौद्ध चित्रकला, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक प्रभाव
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