जलवायु .स्मार्ट कृषि : खाद्य-सुरक्षा और सतत भविष्य के लिए रणनीतियाँ

https://doi.org/10.5281/zenodo.20477919

Authors

  • डॉ० संदीप सिंह वर्मन, प्रीति राठौर

Abstract

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों ने कृषि क्षेत्र को गंभीर चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है, विशेषकर भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में। जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture, CSA) को खाद्य सुरक्षा और सतत भविष्य सुनिश्चित करने की एक प्रभावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार के राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना उत्तर प्रदेश की राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना को कृषि-आधारित आजीविका की स्थिरता हेतु प्राथमिकता दी गई है। उत्तर प्रदेश, जो देश के खाद्य उत्पादन में लगभग 20% योगदान करता है, जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, विशेषकर बुंदेलखंड और पूर्वी क्षेत्रों में वर्षा-आधारित खेती पर निर्भरता के कारण। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि सिंचाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण और जैविक खाद के उपयोग जैसी CSA प्रथाओं को अपनाने से उत्पादकता और किसानों की आय दोनों में वृद्धि हुई है। इस शोध का उद्देश्य CSA की रणनीतियों को खाद्य सुरक्षा, संसाधन संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ना है। निष्कर्षतः, जलवायु-स्मार्ट कृषि केवल तकनीकी हस्तक्षेप नहीं, बल्कि नीति, संस्थागत सहयोग और स्थानीय स्तर पर किसानों की भागीदारी से जुड़ा एक समग्र दृष्टिकोण है, जो भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के लिए खाद्य-सुरक्षा और सतत भविष्य की कुंजी हो सकता है।
मुख्य शब्द - जलवायु-स्मार्ट कृषि, सतत विकास लक्ष्य, खाद्य सुरक्षा, लचीली कृषि पद्धतियाँ, सिंचाई प्रबंधन, उत्तर प्रदेश

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Published

31-05-2026

How to Cite

डॉ० संदीप सिंह वर्मन, प्रीति राठौर. (2026). जलवायु .स्मार्ट कृषि : खाद्य-सुरक्षा और सतत भविष्य के लिए रणनीतियाँ: https://doi.org/10.5281/zenodo.20477919. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(05), 5–11. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1218

Issue

Section

Research Paper