सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता पर प्रभाव : उत्तर प्रदेश का भौगोलिक विश्लेषण
https://doi.org/10.5281/zenodo.20566777
Abstract
उत्तर प्रदेश जैसे जल-संकटग्रस्त राज्य में कृषि का भविष्य जल दक्षता पर निर्भर करता है। इस संदर्भ में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकेंकृविशेषतः ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालीकृसतत कृषि और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध हो रही हैं। प्रस्तुत अध्ययन वर्ष 2014-15 से 2022-23 की अवधि में सूक्ष्म सिंचाई के प्रसार, भूजल स्तर में हुए परिवर्तनों, तथा प्रमुख फसलोंकृगेहूं, धान और गन्नाकृकी उत्पादकता के मध्य अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है। परिणामों से ज्ञात होता है कि 2015-2019 के बीच स्प्रिंकलर प्रणाली के तीव्र विस्तार के साथ फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यद्यपि, 2020 के बाद ड्रिप सिंचाई क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि के बावजूद गेहूं और धान की उत्पादकता में स्थिरता या हल्की गिरावट देखी गई, जबकि गन्ने की उत्पादकता निरंतर बढ़ती रही। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि उक्त अवधि में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार घटा है। निष्कर्षतः सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें जल उपयोग दक्षता और उत्पादकता सुधारने में प्रभावी हैं, किंतु दीर्घकालिक जल संरक्षण हेतु फसल चक्र विविधीकरण और व्यापक जल नीति सुधार अनिवार्य हैं।
प्रमुख शब्द- सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें, भूजल संरक्षण, सतत कृषि, कृषि उत्पादकता ।
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