डिजिटल युग में बैंकिंग क्षेत्र की प्रतिबंधक प्रणाली साइबर सुरक्षाः चुनौती एवं समाधान

https://doi.org/10.5281/zenodo.20712510

Authors

  • डॉ0 सोना धनगर, श्री सुनील मिश्रा

Abstract

बैंकों की सुरक्षा प्रणाली के लिए साइबर सुरक्षा एक महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि बैंकों में ग्राहकों का न सिर्फ पैसा वर्न उनकी संवेदनशील निजी एवं वित्तीय जानकारी भी होती है। यही कारण है कि ग्राहकों की इनकी निजी जानकारी होना ही साइबर आक्रमणों का केन्द्र बना रहता है और यही हमले और इनके होने की आशंका बैंकों को सुदृढ़ सुरक्षा प्रणाली को बनाने को मजबूर करती है। ग्राहकों का भरोसा इसी सुरक्षा प्रणाली की वजह से आकर्षित होता है, जिसको दाव पे लगाके कोई भी बैंक जोखिम नहीं उठाना चाहेगा। सुरक्षा प्रणाली में हुई एक छोटी सी चूक बैंक की वर्षों से बनी साख को सेकिंडों में खाक में मिला सकती है और जाहिर है कि कोई भी बैंक वित्तीय नुकसान को अपनी किसी भूल के कारण क्यों ही वहन करना स्वीकार करेगा। वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में, इंटरनेट बैंकिंग या आनलाइन बैंकिंग ने 21वीं सदी के आधुनिक बैंकिंग युग में क्रांति सी ला दी है। मनुष्य सुचनाओं, विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए विभिन्न उपायों को विकसित करता रहता है, जो उनके लिए अत्याधिक महत्व रखते हैं। इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग तकनीक में हुई प्रगति ने बैंकिंग कार्य को बेहद आसान बना दिया है। बैंकिंग कार्य ऑनलाइन बैंकिंग और एंड्रॉइड मोबाइल फ़ोन के माध्यम से शीर्घता से सम्पन्न हो रहे हैं अब बैंकिंग लेन-देन एक क्लिक मात्र की दूरी पर है।
वर्ष 2016 की नोटबन्दी और यूपीआई की लॉन्चिंग ने भारत की बैंकिंग को हमेशा के लिए बदल दिया है। जो कार्य पहले पासबुक अपडेट कराने के लिए लाइन में लगकर होता था, वह अब एक फत् स्कैन पर हो जाता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के डेटा के अनुसार अप्रैल 2026 में यूपनआई ने 18 अरब ट्रांजैक्शन का आंकडा पार कर लिया है। परन्तु साइबरस्पेस में सूचना प्रौद्योयोगिकी के बढ़ते दुरूपयो से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। जोखिम और उससे जुडी समस्याओं की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है। RBI Report on Trend and Progress of Banking in India 2024-25 बताती है कि डिजिटल पेमेंट फ्रॉड की राशि पिछले 3 वर्ष में 5 गुना बढ़ी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग अभी भी सुरक्षित नहीं होता है। इस लेख का उद्देश्य साइबर हमलों की समीक्षा करना है और बैकिंग से जुडे साइबर अपराधों और हैकर्स द्वारा अपनाई जाने वाली नई तरकीबों और तरीकों पर केंद्रित है। यह अध्ययन पूरी तरह से सहायक डेटा पर आधारित है। इस अध्ययन के निष्कर्ष भारत में आईटी के बढ़ते उपयोग और ऑनलाइन बैंकिंग से जुडे साइबद अपराधों को उजागर करते हैं। इस लेख के माध्यम से ऑनलाइन बैंकिंग में अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित उपयोग के लिए कुछ सुझाव भी दिए गये हैं।
मुख्य २ाब्द- सूचना प्रौद्योयोगिकी, साइबर अपराध, साइबर हमला, मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन बैंकिंग, राष्ट्रीय अपराध रिकार्डिंग कार्यालय, हैकिंग।

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Published

31-12-2025

How to Cite

डॉ0 सोना धनगर, श्री सुनील मिश्रा. (2025). डिजिटल युग में बैंकिंग क्षेत्र की प्रतिबंधक प्रणाली साइबर सुरक्षाः चुनौती एवं समाधान: https://doi.org/10.5281/zenodo.20712510. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 211–223. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1239

Issue

Section

Research Paper