बीमा
DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21155514
Abstract
जीवन और सम्पत्ति पर हमेशा से विभिन्न प्रकार के विनाशकारी तत्त्वों के द्वारा हानि होने का खतरा बना रहता है, इसी कारण मानव के जीवन, उसकी भौतिक सम्पत्ति, उसके द्वारा बनाए वाणिज्य एवं उद्योग में हमेशा अनिश्चितता एवं अस्थिरता होती है और इसी अस्थिरता के कारण मनुष्य हमेशा इस डर में रहता है कि पता नहीं कब उसे किस प्रकार का नुकसान हो जाए, साथ ही मनुष्य इस अनिश्चितता से अपने जीवन, सम्पत्ति, उद्योग और अपने परिवार की सरुक्षा के प्रति हमेशा प्रयासरत रहता है। उपर्युक्त इसी समस्या के समाधान के लिए मनुष्य द्वारा जिस चीज का आविष्कार किया गया, उसे हम सब बीमा प्रणाली के नाम से जानते हैं।
मुख्य शब्द: मानव जीवन, बीमा, अनिश्चितता, अस्थिरता, सुरक्षा, जोखिम, दुर्भाग्य, मृत्यु, परिवार, समुद्री बीमा, अग्नि बीमा, जीवन बीमा, विविध बीमा, राष्ट्रीयकरण, बीमादार, जनंसख्या, पॉलिसी, बीमा अधिनियम, प्रशिक्षण, अभिकर्ता।
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