दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन एवं जापान की कला-संस्कृतियों में भारती देवी सरस्वती के साक्ष्य

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21451855

Authors

  • छाया यादव

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र “दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन एवं जापान की कला-संस्कृतियों में भारती देवी सरस्वती के साक्ष्य” में देवी सरस्वती के वैश्विक सांस्कृतिक प्रसार एवं उनके रूपांतरण का अध्ययन किया गया है। सरस्वती, जो ज्ञान, वाणी, संगीत एवं कला की अधिष्ठात्री देवी हैं, भारतीय परंपराओं जैसे हिंदू, बौद्ध एवं जैन में समान रूप से पूजनीय रही हैं। ऋग्वैदिक काल में नदी के रूप में प्रतिष्ठित सरस्वती, कालांतर में विद्या एवं वाक् की देवी के रूप में विकसित हुईं। व्यापार एवं बौद्ध धर्म के प्रसार के माध्यम से उनका स्वरूप दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन एवं जापान तक पहुँचा, जहाँ वे विभिन्न नामों जैसे थुराथाडी, बिएनकाइतिआन एवं बेंजाइटन से पूजित हुईं। इस प्रकार, यह शोध दर्शाता है कि देवी सरस्वती भारतीय संस्कृति की एक ऐसी सार्वभौमिक प्रतीक हैं, जिनका प्रभाव एशिया की विभिन्न कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
मुख्य शब्द -देवी सरस्वती, ज्ञान एवं वाणी, कला-संस्कृति, दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, जापान, बौद्ध धर्म, सांस्कृतिक प्रसार, बेंजाइटन, बिएनकाइतिआन

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Published

30-06-2026

How to Cite

छाया यादव. (2026). दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन एवं जापान की कला-संस्कृतियों में भारती देवी सरस्वती के साक्ष्य: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21451855. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(06), 72–80. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1256

Issue

Section

Research Paper