ग्लोबल वार्मिंग और भारत पर इसका प्रभावः एक भागोलिक विश्लेषण

Authors

  • डॉ0 चन्द्रशेखर

Abstract

ग्लोबल वार्मिंग शब्द का अर्थ है, पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का समय के साथ गर्म होना, जो कि पूर्व औद्योगिक समय से मानवीय गतिविधियों के कारण देखा जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का मतलब है, पृथ्वी के औसत तापमान में लम्बे समय तक लगातार बढोतरी। यह जलवायु परिवर्तन का एक अहम पहलू है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही आज विश्व में मौसम बदल रहा है। ग्लोबल वार्मिंग को ‘‘भूमंडलीय उष्मीकरण’’ भी कहा जाता है। धीरे-धीरे पृथ्वी के तापमान में होने वाली वृद्धि जिसका प्रभाव मानव, पशु पक्षियों, कृषि एवं मौसम आदि सभी पर देखा जा सकता है। ग्लोबल वार्मिंग के रूप में व्यक्त कर सकते है। इस प्रकार सरल शब्दों में ग्लोबल वार्मिंग से आशय पृथ्वी के तापमान में होने वाली निरन्तर वृद्धि से है, जिसके कारण जलवायु में परिवर्तन आता है। ग्लोबल वार्मिंग आज इस समय और भविष्य में आने वाली सबसे गम्भीर समस्याओं में से एक है। अगर वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान में प्रतिवर्ष 10ब् की वृद्धि होती है तो पृथ्वी पर रहने वाले मानव, पशु , पक्षी, कृषि एवं मौसम गम्भीर खतरे में होंगे। वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव हमारे चारों ओर दिखाई दे रहे हैं, और यह न केवल इसके खिलाफ व्यक्तिगत कार्यवाही पर निर्भर करता है, और दुनिया भर की सरकारों के साथ मिलकर और उनका समर्थन करके भी समाधान ढूंढ सकते हैं, ग्लोबल वार्मिंग के कई सिद्धांत हैं, जिसका अर्थ है कि एसे कई कारक है जो ग्लोबल वार्मिंग के कारणों के रूप में कार्य करते हैं, और इसे कम करने के तरीके हैं, जो अभी भी शोध के अधीन हैं, कि उन्हें दुनिया में कुशलता पूर्वक कैसे उपयोग किया जाए।
बीज शब्दः ग्लोबल वार्मिंग, भारत, पृथ्वी, जलवायु प्रणाली, प्रभाव, तापमान

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Published

30-06-2025

How to Cite

डॉ0 चन्द्रशेखर. (2025). ग्लोबल वार्मिंग और भारत पर इसका प्रभावः एक भागोलिक विश्लेषण. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(06), 172–178. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1278

Issue

Section

Research Paper