भारत में घरेलू हिंसा एवं महिला मानवाधिकारः वर्तमान परिदृश्य

Authors

  • श्रीमती सुदीपमाला

Abstract

प्रस्तुत अध्ययन भारत में घरेलू हिंसा एवं महिला मानवाधिकार की वर्तमान परिदृश्य का आंकलन एवं विश्लेषण करने के उद्देश्य से किया गया है। उद्देश्य की पूर्ति हेतु विश्लेषणात्मक शोध प्रविधि का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक तथ्यों के संकलन हेतु 180 महिला एवं 180 पुरूष सूचनादाताओं का चयन उ0 प्र0 के जनपद अलीगढ़ से किया गया है। घरेलू हिंसा महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा का एक बहुत ही प्रमुख प्रकार है। हमारे यहाँ महिलायें प्राचीन काल से ही अवमानना, प्रताड़ना, यातनाओं तथा शोषण की शिकार होती रही हैं, कारण कुछ भी रहे हों, इसे नकारा नहीं जा सकता। इस समस्या के लिए व्यक्तित्व तथा परिस्थिति दो उपागम महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार के विगत 20 वर्षों के आंकड़े इसका स्पष्ट प्रमाण हैं कि महिलाओं के विरूद्ध अपराधों का ग्राफ निरन्तर बढ़ा है। घरेलू हिंसा के अन्तर्गत मुख्यतः दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या, पत्नी को मारना पीटना, लैंगिक दुर्व्यवहार, बच्चों, विधवाओं, वृद्ध महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, कौटुम्बिक व्यभिचार आदि आते हैं जिनकी वजह से महिलाओं के समक्ष सामाजिक, आर्थिक तथा भावनात्मक सामंजस्य की समस्यायें जनित हो जाती हैं; साथ ही समाज भी उन्हें हेय दृष्टि से देखता है। परिणामतः वे असहाय और अवसादग्रस्त होकर जीवन जीती हैं। सूचनादाताओं ने महिला अशिक्षा, महिलाओं द्वारा महिलाओं के विरूद्ध घरेलू हिंसा को चुपचाप सहन करते रहना व उत्पीड़क का व्यक्तित्व दोषपूर्ण होना आदि कारकों को घरेलू हिंसा के लिए उत्तरदायी बताया है।
शब्द संक्षेप- घरेलू हिंसा, प्रताड़ना, महिला-मानवाधिकार, घरेलू हिंसा अधिनियम।

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Published

03-09-2023

How to Cite

श्रीमती सुदीपमाला. (2023). भारत में घरेलू हिंसा एवं महिला मानवाधिकारः वर्तमान परिदृश्य. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 2, 36–43. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/236