मोहभंग (Disenchantment), तर्कवाद और अतार्किकता (Irrational) का पुनरुत्थान: आधुनिकता के विरोधाभास एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
Abstract
आधुनिकता को बुद्धि, तर्क और विज्ञान के युग के रूप में देखा गया था, जहाँ धार्मिकता, अंधविश्वास और मिथकीय व्याख्याएँ पीछे छूटनी थीं। मैक्स वेबर ने इसे मोहभंग कहा, जिसमें दुनिया को तर्कसंगत और वैज्ञानिक तरीकों से समझा जाना था। परंतु आज का यथार्थ इससे बिल्कुल भिन्न है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के चरम विकास के बावजूद, धार्मिक कट्टरता, अंधविश्वास, षड्यंत्र सिद्धांत, और छद्म विज्ञान फिर से समाज में फल-फूल रहे हैं। यह लेख आधुनिकता के इस विरोधाभास पर समाजशास्त्रीय चिंतन प्रस्तुत करता है। इसमें वेबर के तर्कवाद, आयरन केज, और अस्तित्वगत संकट की अवधारणाओं को आधार बनाया गया है। लेख यह विश्लेषण करता है कि क्यों तर्क और विज्ञान के विकास के बावजूद समाज पुनः अवैज्ञानिकता , अतार्किकता की ओर लौटता है।
इसके प्रमुख कारणों में सामाजिक अलगाव, वैश्वीकरण से उत्पन्न सांस्कृतिक असुरक्षा, डिजिटल मीडिया द्वारा फैलाई गई भ्रांतियाँ, और उपभोक्तावाद द्वारा इन तथ्यों जैसे अंधविश्वास और अन्य का वस्तु में बदल दी गई मान्यताएँ शामिल हैं। साथ ही, आदोर्नाे, होर्खाइमर, हाबरमास, और बौमन जैसे चिंतकों के सिद्धांतों का उपयोग कर इस प्रवृत्ति को समझने का प्रयास किया गया है। निष्कर्ष के रूप में यह लेख तार्किकता के एक ऐसे रूप की आवश्यकता बताता है जो आत्म-निरिक्षक, समावेशी और मानवीय आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हो। तभी हम आधुनिकता के इस संकट का समाधान खोज सकते हैं।
मुख्य शब्द- मोहभंग, तर्कवाद, अवैज्ञानिकता, आधुनिकता, ज्ञान का समाजशास्त्र
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