भारतीय संगीत का सांस्कृतिक एवं सामाजिक पक्ष

Authors

  • डॉ0 आम्रपाली

Abstract

भारतीय संगीत केवल एक कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह भारत की गहरी सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का भी प्रतीक है। यह संगीत विविध धार्मिक परंपराओं, जातीय समुदायों, त्योहारों और जीवनशैली के माध्यम से भारतीय समाज में गहराई से रचा-बसा है। शास्त्रीय, लोक और धार्मिक संगीत की परंपराएं न केवल सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करती हैं, बल्कि सामाजिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और सामुदायिक जीवन में भी योगदान देती हैं। यह शोधपत्र भारतीय संगीत के विकास, उसके विविध स्वरूपों और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों का विश्लेषण करता है। संगीत किस प्रकार सामाजिक आंदोलनों, धार्मिक अनुष्ठानों, जातीय पहचान, और लोक संस्कृति का माध्यम बना है, इस पर भी विचार किया गया है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक समय में संगीत की सामाजिक भूमिका, जैसे शिक्षा, मनोरंजन, और जनजागरूकता अभियानों में उपयोग, को भी इस अध्ययन में समाहित किया गया है।
मुख्य शब्द- भारतीय संगीत, सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक चेतना, शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, धार्मिक संगीत, सांप्रदायिक समरसता, सामाजिक एकता, संगीत और शिक्षा

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Published

31-03-2023

How to Cite

डॉ0 आम्रपाली. (2023). भारतीय संगीत का सांस्कृतिक एवं सामाजिक पक्ष. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 2(3), 58–62. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/844

Issue

Section

Research Paper