ये और मन रहा राम का - राम की शक्ति पूजा

Authors

  • मानवेंद्र यादव

Abstract

ये और मन रहा राम का पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की प्रसिद्ध काव्यकृति राम की शक्ति पूजा से ली गई हैं। यह कविता पारंपरिक रामकथा को एक नए मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यहाँ राम केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक संघर्षरत मनुष्य के रूप में चित्रित किए गए हैं, जो अपनी सीमाओं और संदेहों से जूझते हुए शक्ति (दुर्गा) की उपासना करते हैं। ये और मन रहा राम का पंक्ति उस आंतरिक द्वंद्व को प्रकट करती है जहाँ राम युद्ध की तैयारी में बाह्य पराक्रम के साथ-साथ आत्मचिंतन और मानसिक शक्ति की आवश्यकता को अनुभव करते हैं। यह कविता भारतीय काव्य परंपरा में भक्ति, शक्ति और मानवता के समन्वय का अद्भुत उदाहरण है।
मुख्य शब्द- राम की शक्ति पूजा, आत्मसंघर्ष, मानव राम की छवि, शक्ति साधना, धार्मिक पुनर्थापन, नवीन दृष्टिकोण, काव्यात्मक मनोविज्ञान, भारतीय भक्ति काव्य

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Published

31-01-2025

How to Cite

मानवेंद्र यादव. (2025). ये और मन रहा राम का - राम की शक्ति पूजा. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(01), 136–144. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/865

Issue

Section

Research Paper