नागार्जुन व्यक्तित्व दर्पण (निबंध - आईने के सामने)
Abstract
नागार्जुन हिंदी साहित्य के उन विरल रचनाकारों में हैं जिन्होंने अपने व्यक्तित्व, वैचारिक साहस और जनपक्षधर रचनाशक्ति से साहित्य को नया आयाम दिया। निबंध ‘आईने के सामने’ उनकी आत्मदर्शी शैली, आत्ममूल्यांकन और सामाजिक दृष्टि का दर्पण प्रस्तुत करता है। नागार्जुन यहाँ आईने के रूपक के माध्यम से व्यक्ति और लेखक दोनों का भीतर बाहर का चित्र उकेरते हैं। उनके व्यक्तित्व में विद्रोही तेवर, लोकतांत्रिक चेतना, लोकजीवन से गहरी आत्मीयता तथा संवेदनात्मक ईमानदारी प्रमुख रूप से प्रकट होती है। यह निबंध न केवल उनके अंतर्मन का सहज उद्घाटन है, बल्कि उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के विकास, संघर्ष और सामाजिक प्रतिबद्धता को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत भी सिद्ध होता है।
मुख्य शब्द- नागार्जुन, व्यक्तित्व-दर्पण, आत्मदर्शन, जनपक्षधरता, वैचारिक प्रतिबद्धता, सामाजिक चेतना, विद्रोही तेवर, आत्ममूल्यांकन
Additional Files
Published
How to Cite
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.