लोक कला के सामाजिक एवं आर्थिक आयाम
Abstract
भारतीय संस्कृति एवं परम्परा प्राचीन काल से ही काफी समृद्ध एवं गौरवशाली रही है। इसकी इस समृद्ध संस्कृति एवं परम्परा का प्रमुख कारण इसकी विविधता में निहित है क्योंकि दुनिया की विभिन्न सभ्यताओं, संस्कृतियों एवं रीतियों को इसने न सिर्फ आत्मसात किया अपितु उन्हें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति में यथोचित सम्मान एवं स्थान भी दिया है। विश्व की तमाम संस्कृतियों, सभ्यताओं एवं परम्पराओं को अपनी सभ्यता में स्थान देने के पीछे कारण जो भी हो, वर्तमान उससे कदाचित सरोकार नहीं रखता है बल्कि महत्वपूर्ण बात तो ये हैं कि भारतीय संस्कृति की यह अनूठी परम्परा उसे वैश्विक पटल पर वसुधैव कुटुंबकम की परम्परा के प्रतिपादक के रूप में स्वीकृति प्रदान करती है।
मुख्य शब्द- भारतीय संस्कृति, परम्परा, लोक कला, सामाजिक एवं आर्थिक आयाम
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