पर्यावरण संरक्षण और भारतीय ज्ञान परम्परा
Abstract
पर्यावरण शब्द का अर्थ है परि (आस-पास या चारों ओर का), आवरण (ढका हुआ) इस शब्द में प्रकृति के विभिन्न घटक जैसे - जल, वायु, मृदा, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु मानव जाति एवं उनसे संबधित अन्य घटकों के परस्पर व्यवहार समाहित है। एवं इस सम्पूर्ण तंत्र को ही पर्यावरण की संज्ञा देते हैं। पर्यावरण के बिना मानव का सतत् विकास सम्भव नहीं है अतः इस बहुमुल्य पर्यावरण के संरक्षण में हमारे योगदान की इस लेख में विवेचना है इसी बात को साहित्यिक रूप से भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ जोड़ा जाता है भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है जिसमें ज्ञान और विज्ञान लौकिक और पारलौकिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय है। ऋग्वेद के समय से ही शिक्षा प्रणाली जीवन के नैतिक, भौतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक मूल्यों पर केंद्धित होकर विनम्रता,सत्यता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सभी के लिए सम्मान जैसे मूल्यों पर जोर देती थी। वेदों में विद्या को मनुष्यता की श्रेस्ठता का आधार स्वीकार किया गया था और आज भी उन्हीं मूल्यों को ग्रहण करती हुई भारतीय ज्ञान परम्परा चली आ रही है।
मुख्य शब्द- पर्यावरण, सतत् विकास, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय ज्ञान परम्परा
Additional Files
Published
How to Cite
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.