स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत मंे स्त्री शिक्षा की दशा एवं दिशा
Abstract
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में स्त्री शिक्षा का क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। संविधान में समानता और शिक्षा के अधिकार की व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीतियाँ, सर्व शिक्षा अभियान, बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजनाएँ तथा उच्च शिक्षा में आरक्षण एवं छात्रवृत्ति कार्यक्रमों ने स्त्री शिक्षा के विस्तार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके बावजूद ग्रामीण, शहरी विषमता, बाल विवाह, गरीबी, सामाजिक रूढ़ियाँ, डिजिटल विभाजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी जैसी चुनौतियाँ अब भी विद्यमान हैं। वर्तमान समय में स्त्री शिक्षा केवल साक्षरता तक सीमित न रहकर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, उच्च शोध तथा आत्मनिर्भरता से जुड़ रही है। यह अध्ययन स्वतंत्रता के बाद भारत में स्त्री शिक्षा की प्रगति, उसकी समस्याओं तथा भविष्य की दिशा का विश्लेषण करता है और यह प्रतिपादित करता है कि सशक्त, शिक्षित स्त्री ही समावेशी और सतत विकास की आधारशिला है।
मुख्य शब्द- स्त्री शिक्षा, स्वतंत्रता पश्चात भारत, शैक्षिक नीतियाँ, सामाजिक परिवर्तन, लैंगिक समानता, बालिका सशक्तिकरण, शिक्षा में चुनौतियाँ, आत्मनिर्भरता
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