किशोरों में तनाव प्रबंधन हेतु प्राणायाम और ध्यान का प्रभाव

Authors

  • डॉ0 सुरेन्द्र सिंह, डॉ0 विजय सिंह, डॉ0 अपर्णा शर्मा

Abstract

किशोरावस्था जीवन का एक संवेदनशील एवं परिवर्तनशील चरण है, जिसमें शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्तर पर अनेक परिवर्तन होते हैं। वर्तमान समय में बढ़ती शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाएँ, सामाजिक दबाव, तकनीकी प्रभाव तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण किशोरों में तनाव की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अत्यधिक तनाव किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार, शैक्षणिक उपलब्धि एवं व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ऐसी स्थिति में तनाव प्रबंधन के लिए प्रभावी, सुरक्षित एवं प्राकृतिक उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य किशोरों में तनाव प्रबंधन हेतु प्राणायाम एवं ध्यान के प्रभाव का अध्ययन करना है। इस अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया है कि नियमित रूप से प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास करने से किशोरों के तनाव स्तर में किस प्रकार का परिवर्तन आता है। शोध के लिए मात्रात्मक पद्धति को अपनाया गया तथा 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को अध्ययन का नमूना बनाया गया। तनाव के स्तर का आकलन मानकीकृत तनाव मापनी के माध्यम से अभ्यास से पूर्व एवं पश्चात किया गया। अध्ययन समूह को निर्धारित अवधि तक प्राणायाम एवं ध्यान का नियमित अभ्यास कराया गया। अध्ययन के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास किशोरों के तनाव स्तर को उल्लेखनीय रूप से कम करता है। इसके साथ ही ध्यान क्षमता, भावनात्मक संतुलन, आत्म-नियंत्रण एवं मानसिक शांति में भी सकारात्मक सुधार देखा गया। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि प्राणायाम एवं ध्यान किशोरों के लिए तनाव प्रबंधन का एक प्रभावी, सरल एवं उपयोगी साधन है। विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में इन्हें नियमित दिनचर्या का भाग बनाकर किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सकता है।
मुख्य शब्द - किशोरावस्था, तनाव, तनाव प्रबंधन, प्राणायाम, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य, योग, भावनात्मक संतुलन, एकाग्रता, मानसिक शांति

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Published

31-12-2025

How to Cite

डॉ0 सुरेन्द्र सिंह, डॉ0 विजय सिंह, डॉ0 अपर्णा शर्मा. (2025). किशोरों में तनाव प्रबंधन हेतु प्राणायाम और ध्यान का प्रभाव. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 21–32. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1012

Issue

Section

Research Paper