आरक्षण नीति और चुनावी राजनीति

Authors

  • डा0 अरविन्द कुमार शुक्ल

Abstract

भारतीय लोकतंत्र की संरचना सामाजिक न्याय, समानता और प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों पर आधारित है। आरक्षण नीति स्वतंत्र भारत की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था का एक केंद्रीय तत्व रही है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक मुख्यधारा में लाना रहा है। समय के साथ आरक्षण नीति केवल सामाजिक न्याय का साधन न रहकर चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी बन गई। यह शोध-पत्र आरक्षण नीति और चुनावी राजनीति के अंतर्संबंध का विश्लेषण करता है। इसमें आरक्षण के संवैधानिक आधार, ऐतिहासिक विकास, मंडल आयोग के प्रभाव, क्षेत्रीय दलों के उदय, वोट बैंक राजनीति, जातिगत ध्रुवीकरण, तथा हालिया आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण जैसे मुद्दों का आलोचनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन यह दर्शाता है कि आरक्षण नीति ने भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाया है, परंतु साथ ही चुनावी राजनीति में जातीय समीकरणों को सुदृढ़ किया है। परिणामस्वरूप, नीति का सामाजिक उद्देश्य कई बार राजनीतिक लाभ की रणनीति में परिवर्तित होता दिखाई देता है।
मुख्य शब्द- आरक्षण नीति, चुनावी राजनीति, सामाजिक न्याय, मंडल आयोग, वोट बैंक, जाति-आधारित राजनीति, भारतीय लोकतंत्र

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Published

27-02-2026

How to Cite

डा0 अरविन्द कुमार शुक्ल. (2026). आरक्षण नीति और चुनावी राजनीति. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(02), 19–29. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1054

Issue

Section

Research Paper

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