अमेरिका-ईरान संघर्ष एवं Strait of Hormuz संकट के संदर्भ में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता
Abstract
2026 के पश्चिम एशिया संकट, विशेष रूप से ईरानदृइजराइलदृसंयुक्त राज्य अमेरिका संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को गहराई से प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अत्यधिक आयात-निर्भर है, इस संकट के बीच एक बहुआयामी रणनीति अपनाता हुआ दिखाई देता है। इसमें आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण, वैकल्पिक समुद्री मार्गों का उपयोग, रणनीतिक भंडारण क्षमता का विस्तार तथा घरेलू उत्पादन वृद्धि शामिल है। साथ ही, भारत की समुद्री रणनीतिकृहिंद महासागर में बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति और बहुपक्षीय सहयोगकृऊर्जा सुरक्षा को व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ती है। यद्यपि भारत ने अल्पकालिक संकट प्रबंधन में सफलता प्राप्त की है, फिर भी हॉर्मुज पर आंशिक निर्भरता एक संरचनात्मक जोखिम बनी हुई है। कूटनीतिक स्तर पर, सीमित प्रभाव-क्षमता के कारण भारत की मध्यस्थता भूमिका भी यथार्थवादी सीमाओं से बंधी है। अतः, दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता भारत की प्राथमिक आवश्यकता बनी हुई है।
मुख्य शब्द - हिंददृप्रशांत, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति विविधीकरण, समुद्री रणनीति, रणनीतिक स्वायत्तता
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