भारतीय षोडश संस्कारों की वर्तमान समय में प्रांसगिकता

Authors

  • कु0 आँचल

Abstract

आधुनिक समय में महत्वाकांक्षाओं की दौड़ में व्यक्ति समाज, संस्कृति व संस्कार से दूर चला गया है,वर्तमान समय में समाज में मूल्यों को संस्कार का नाम देते हैं, जिन मूल्यों के कारण मानव मूल्यवान होता है। किन्तु आज के परिवेश में नैतिक, सामाजिक तथा चारित्रिक मूल्यों का अभाव दिख रहा है। जिसके कारण समाज लक्ष्यहीन दिखता है। उदाहरण के लिए 50-100 वर्ष पूर्व जायें तो भारतीय संस्कृति का परिदृश्य स्पष्ट दिखता था,बड़ों के प्रति सम्मान, छोटों के प्रति स्नेह, वेशभूषा में शालीनता, वचन में मधुरता, विचारों में उदारता, सामूहिक परिवार, परोपकार जैसे मूल्यों के प्रति निष्ठावान, कर्तव्यनिष्ठा से युक्त अपने-अपने दायित्वों के प्रति सजग रहना एवं सुदृढ़ दिनचर्या के अनुसार अपने आप को ठीक रखते हुये दीन-दुखियों की मदद करना आदि इस प्रकार के नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों को समाहित करते हुए उस समय के समाज का परिदृश्य था। किन्तु उस संस्कृति और संस्कार का परिदृश्य आज कहीं खो सा गया है, विकासवाद, भौतिकवाद, तथा विज्ञानवाद समाज में धार्मिक मूल्यों का कोई स्थान नही शेष नहीं रहा है। जिसके कारण हमारे उत्तरवर्ती परंपरा विपरीत राह पर चल चुकी है। आज समाज में संस्कार विलुप्त हो चुके है। विनम्रता, दया, दक्षिणा का नाममात्र ही सुनाई देता है। आज छोटे बच्चे भी अमर्यादित संभाषण, अनुचित कुकृत्य करते है या यूँ कहा जाय कि लगभग कहीं न कहीं व्यक्ति उक्त क्रियाओं से ग्रस्त ही है, मुख्यतः इन पहलुवों के पीछे कारण क्या है? पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण, भौतिकवाद प्रस्तुत शोध का प्रतिपाद्य- षोडश संस्कारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता,संस्कार क्या है, हमारे जीवन में संस्कारो का होना कितना आवश्यक है, और इसका प्रयोजन क्या है, इसके पीछे का वैज्ञानिक महत्व क्या है, इत्यादि कारण परिणामो का विश्लेषण शामिल है।
मुख्य शब्द- षोडश संस्कार, भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्य, नैतिक शिक्षा, जीवन चक्र, सांस्कृतिक परंपरा, आधुनिक समाज, व्यक्तित्व विकास

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Published

31-10-2025

How to Cite

कु0 आँचल. (2025). भारतीय षोडश संस्कारों की वर्तमान समय में प्रांसगिकता. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(10), 86–94. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1161

Issue

Section

Research Paper