पाश्चात्त्य दार्शनिकों का भारतीय दर्शन पर दृष्टिकोण

Authors

  • कु0 आँचल

Abstract

भारतीय दर्शन अपनी प्राचीनता और गुढ़ता तथा अध्यात्मिकता के लिये विश्वदर्शन में विशिष्ट स्थान रखता है। उन्नीसवी पूर्व बीसती शताब्दी में अनेक पाश्चात्य दार्शनिकों और विद्वानों मैं भारतीय दर्शन का गम्भीर अध्ययन किया और अपने विचार प्रस्तुत किये। खासकर जब पाश्चात्य भौतिकवाद से उबकर अध्यात्मिकता की ओर देखने लगा। उन्हें आध्यात्मिकता, आत्मज्ञान हेतु भारतीय विचार ‘अहं ब्रम्हास्मि’ का समावेश हुआ और एक वैश्विक दर्शन की नींव पड़ी। इस शोध लेख का उद्देश्य पाश्चात्य दार्शनिक चिन्तक - विशेषतः शोपेनहावर, इलियट, कांट, हेगेल, मैक्समूलर और पॉल ड्यसूसन इत्यादि का भारतीय दर्शन संबंधी दृष्टिकोण का विश्लेषण करना तथा यह स्पष्ट करना कि भारतीय दर्शन में पाश्चात्य दार्शनिक चिन्तन को किस प्रकार प्रभावित किया।
मुख्य शब्द- लनात्मक दर्शन, आध्यात्मिकता, अद्वैतवाद, रहस्यवाद, सार्वभौमिक सत्य, नैतिक दर्शन, ज्ञानमीमांसा, सांस्कृतिक संवाद,

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Published

31-12-2025

How to Cite

कु0 आँचल. (2025). पाश्चात्त्य दार्शनिकों का भारतीय दर्शन पर दृष्टिकोण. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(12), 189–192. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1165

Issue

Section

Research Paper