दलित कहानी दिशा एवं दशा

Authors

  • डॅा0 सुमति सिंह

Abstract

दलित कहानी साहित्य भारतीय समाज की सामाजिक संरचना, विशेषतः जाति-व्यवस्था की जटिलताओं और उससे उत्पन्न विषमताओं का सशक्त अभिव्यक्ति माध्यम है। दलित कथाकारों ने अपने अनुभवों, संघर्षों और सामाजिक यथार्थ को कथा-साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत कर मुख्यधारा साहित्य में एक नई दिशा का उद्घाटन किया है। दलित कहानी की दिशा सामाजिक न्याय, समानता, आत्मसम्मान और मानवीय अधिकारों की स्थापना की ओर उन्मुख है। यह साहित्य न केवल शोषण और उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाता है, बल्कि दलित चेतना, अस्मिता और प्रतिरोध की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
दलित कहानी की दशा पर विचार करने पर स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक दौर में यह साहित्य उपेक्षित रहा, किंतु समय के साथ इसे व्यापक स्वीकृति मिली है। आज दलित कथाएँ अकादमिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं और सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में कार्य कर रही हैं। हालांकि, अभी भी प्रकाशन, प्रतिनिधित्व और सामाजिक स्वीकार्यता के स्तर पर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अतः दलित कहानी की दिशा और दशा का सम्यक अध्ययन सामाजिक समावेशन और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य शब्द- दलित साहित्य, दलित कहानी, सामाजिक न्याय, अस्मिता, जाति-व्यवस्था, शोषण, प्रतिरोध, सामाजिक परिवर्तन

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Published

31-10-2025

How to Cite

डॅा0 सुमति सिंह. (2025). दलित कहानी दिशा एवं दशा. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(10), 95–101. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1167

Issue

Section

Research Paper