सृष्टि विज्ञान-वैदिक वाङमय के सन्दर्भ में

Authors

  • डा० शुचि

Abstract

वेदों का मूल विषय ’सृष्टि विज्ञान’ या ’सृष्टि विद्या’ हैं सृष्टि की उत्पति विषयक अवधारणा का प्रथम सुत्रपात ’नासदीय सूक्त’ में प्राप्त होता है, जिसमें सृष्टि से सम्बन्धित अनेक कल्पानायें की गयी हैं। प्रजापति सृष्टि को बढ़ई के रूप में समानता करते हुये स्पष्ट किया गया कि जिस प्रकार कोई बढ़ई लकड़ी के उपकरणों को सजाकर भवन का निर्माण करता है ठीक उसी प्रकार प्रजापति ने विष्वकर्मा के रूप में इस सृष्टि का निर्माण किया है यह प्रजापति ही इंद्र, वायु और सूर्य के रूप में सम्पूजनीय है।
आप्राधावा पृथ्वी अन्तरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्तुषष्च।
कूट शब्द- सृष्टि, उत्पŸिा, वैदिक वाङमय, नासदीय सूक्त, सृष्टि

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Published

31-10-2025

How to Cite

डा० शुचि. (2025). सृष्टि विज्ञान-वैदिक वाङमय के सन्दर्भ में. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(10), 102–105. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1188

Issue

Section

Research Paper