सोशल मीडिया और राजनीतिक संप्रेषण
https://doi.org/10.82471/d1wyc-48r89
Abstract
इक्कीसवीं सदी में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने राजनीति और समाज के संबंधों को गहराई से प्रभावित किया है। सोशल मीडिया ने राजनीतिक संप्रेषण के पारंपरिक माध्यमों जैसे समाचार पत्र, रेडियो और टेलीविजन को चुनौती देते हुए नागरिकों, राजनीतिक दलों, सरकारों तथा सामाजिक समूहों के बीच प्रत्यक्ष संवाद की नई संभावनाएँ विकसित की हैं। फेसबुक, ट्विटर (एक्स), इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप तथा टेलीग्राम जैसे मंचों ने राजनीतिक विचारों, अभियानों, चुनावी रणनीतियों और जनमत निर्माण को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। वर्तमान शोध पत्र का उद्देश्य सोशल मीडिया और राजनीतिक संप्रेषण के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया है कि सोशल मीडिया लोकतांत्रिक भागीदारी, राजनीतिक जागरूकता, चुनावी राजनीति, जनमत निर्माण तथा राजनीतिक ध्रुवीकरण को किस प्रकार प्रभावित करता है। शोध में गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का प्रयोग किया गया है तथा द्वितीयक स्रोतों जैसे पुस्तकों, शोध पत्रों, सरकारी रिपोर्टों, समाचार स्रोतों और डिजिटल प्लेटफार्मों से प्राप्त सामग्री का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक संप्रेषण को अधिक लोकतांत्रिक, त्वरित और सहभागितापूर्ण बनाया है, किंतु इसके साथ ही फेक न्यूज, ट्रोल संस्कृति, साइबर प्रचार, डेटा दुरुपयोग और वैचारिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया आधुनिक लोकतंत्र का एक प्रभावशाली उपकरण बन चुका है, जिसके सकारात्मक उपयोग हेतु डिजिटल साक्षरता, नैतिक आचरण तथा प्रभावी नियामक व्यवस्था आवश्यक है।
मुख्य शब्द- सोशल मीडिया, राजनीतिक संप्रेषण, लोकतंत्र, जनमत निर्माण, डिजिटल राजनीति, चुनाव अभियान, फेक न्यूज, राजनीतिक भागीदारी
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