आधुनिक शिक्षा में नैतिक मूल्यों का क्षरणः कारण एवं समाधान

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21098350

Authors

  • डॉ० मालती वर्मा

Abstract

शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान, कौशल और रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना भी है। किसी भी समाज की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उसके नागरिक कितने नैतिक, उत्तरदायी और मानवीय मूल्यों से युक्त हैं। वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक, तकनीकी एवं बाजारोन्मुख हो गया है। इसके परिणामस्वरूप नैतिक मूल्यों की उपेक्षा बढ़ी है, जिससे विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता, असहिष्णुता, हिंसा, भ्रष्टाचार, स्वार्थ, सामाजिक उत्तरदायित्व की कमी तथा मानवीय संवेदनाओं का ह्रास देखने को मिल रहा है। यह शोध-पत्र आधुनिक शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों के क्षरण के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करते हुए उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। अध्ययन का आधार विभिन्न शैक्षिक सिद्धांतों, सामाजिक परिस्थितियों तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विश्लेषण है। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा में नैतिकता का समावेश केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर शिक्षण-पद्धति, विद्यालयी वातावरण, पारिवारिक सहयोग तथा सामाजिक सहभागिता के माध्यम से किया जाना चाहिए।
मुख्य शब्दः- आधुनिक शिक्षा, नैतिक मूल्य, चरित्र निर्माण, मूल्य शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व, व्यक्तित्व विकास।

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Published

30-06-2026

How to Cite

डॉ० मालती वर्मा. (2026). आधुनिक शिक्षा में नैतिक मूल्यों का क्षरणः कारण एवं समाधान: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21098350. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(06), 1–7. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1242

Issue

Section

Research Paper