दक्षिण पूर्व एशिया की बदलती भू राजनीति में भारत की एक्ट ईस्ट नीति अवसर चुनौतियां एवं सामरिक निहत्तार्थ

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21744507

Authors

  • डॉ0 नलिनी लता सचान

Abstract

21वीं सी सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था में शक्ति राजनीति का केंद्र अमेरिका तथा यूरोप से स्थानांतरित होकर एशिया और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र होता जा रहा है। इस क्षेत्र का बढ़ता हुआ महत्व केवल आर्थिक न होकर सामरिक राजनीतिक एवं सामुद्रिक क्षेत्र तक विस्तृत है। जिससे यह क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है। इस क्षेत्र के महत्व तथा अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास का ध्यान में रखकर भारत ने अपनी पूर्ववर्ती लुक ईस्ट पॉलिसी को सन 2014 में और अधिक सक्रीय स्वरूप प्रदान करते हुए एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया। जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के विकास के साथ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक ,राजनीतिक सामरिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को पहले से अधिक सुदृढ़ और मजबूत करना तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र को एक नियम आधारित समावेशी, स्मृति तथा वैश्विक शक्तियों की प्रतिस्पर्धा मुक्त क्षेत्र बनाना है। प्रस्तुत शोध पत्र दक्षिण पूर्व एशिया की बदलती भू-राजनीति के दृष्टिगत भारत की एक्ट ईस्ट नीति की समीक्षा करता है तथा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों तथा इससे जुड़े विभिन्न संगठनों जैसे आसियान, बिम्सटेक, क्वॉड तथा हिन्द प्रशान्त पर आसियान दृष्टिकोण (।व्प्च्) सुदृढ़ के साथ उसके सुदन होते संबंधों को रेखांकित करने के साथ ही लक्ष्यों को पूरा करने के मार्ग की चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है।
मुख्य शब्द- एक्ट ईस्ट नीति, दक्षिण पूर्व एशिया, हिंद प्रशांत, आसियान ,क्वॉड, बिम्सटेक, भू- राजनीति, दक्षिण पूर्व, भारत।

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Published

31-07-2026

How to Cite

डॉ0 नलिनी लता सचान. (2026). दक्षिण पूर्व एशिया की बदलती भू राजनीति में भारत की एक्ट ईस्ट नीति अवसर चुनौतियां एवं सामरिक निहत्तार्थ: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21744507. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 5(07), 26–31. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1265

Issue

Section

Research Paper