सब्सिडी राजनीति और आर्थिक अनुशासन
Abstract
सब्सिडी राजनीति समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद विषय है। विशेष रूप से विकासशील देशों में, जहां गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ विद्यमान हैं, वहाँ सरकारें जनसमर्थन प्राप्त करने तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार की सब्सिडियों की घोषणा करती हैं। परंतु जब सब्सिडियाँ राजनीतिक लाभ के लिए असंतुलित रूप से दी जाती हैं, तो यह आर्थिक अनुशासन, राजकोषीय स्थिरता और दीर्घकालीन विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। यह शोध-पत्र सब्सिडी राजनीति के स्वरूप, उद्देश्यों, आर्थिक प्रभावों तथा आर्थिक अनुशासन पर उसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में भारत सहित वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सब्सिडी व्यवस्थाओं का तुलनात्मक परीक्षण किया गया है। इसमें खाद्य, उर्वरक, पेट्रोलियम, बिजली, कृषि ऋण माफी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (क्ठज्) जैसी योजनाओं का विश्लेषण किया गया है। शोध से यह स्पष्ट होता है कि लक्षित और पारदर्शी सब्सिडियाँ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देती हैं, जबकि राजनीतिक लाभ हेतु अनियंत्रित सब्सिडियाँ राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति और आर्थिक असंतुलन को जन्म देती हैं। अतः आर्थिक अनुशासन बनाए रखने हेतु नीतिगत सुधार, पारदर्शिता, लक्षित वितरण और तकनीकी साधनों का उपयोग आवश्यक है।
मुख्य शब्द- सब्सिडी राजनीति, आर्थिक अनुशासन, राजकोषीय घाटा, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, लोकलुभावन नीतियाँ, सामाजिक न्याय, वित्तीय स्थिरता, भारत
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