भारत में चुनावी नैतिकता का ह्रासः कारण, परिणाम एवं समाधान

Authors

  • डॉ0 अरविंन्द कुमार शुक्ल

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र भारत में चुनावी नैतिकता का ह्रास” भारतीय लोकतंत्र की एक गंभीर और समकालीन समस्या का विश्लेषण करता है। लोकतंत्र की सफलता निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं नैतिक चुनावों पर निर्भर करती है। भारत, विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद, पिछले कुछ दशकों में चुनावी प्रक्रिया में नैतिक मूल्यों के निरंतर क्षरण का साक्षी रहा है। यह शोध चुनावी राजनीति में धनबल, बाहुबल, अपराधीकरण, जाति-धर्म आधारित ध्रुवीकरण, मीडिया के दुरुपयोग तथा संस्थागत कमजोरियों के प्रभावों का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में सैद्धांतिक एवं अनुभवजन्य दोनों दृष्टिकोणों को अपनाया गया है। शोध की पद्धति में वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक एवं तुलनात्मक विधियों का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतोंकृजैसे निर्वाचन आयोग की रिपोर्टें, न्यायिक निर्णय, सरकारी दस्तावेज, समाचार पत्र, शोध पत्रिकाएँ तथा पुस्तकोंकृका गहन विश्लेषण किया गया है। 2000 से 2024 के मध्य हुए विभिन्न चुनावों के केस अध्ययनों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार चुनावी नैतिकता का ह्रास लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि चुनावी नैतिकता का संकट केवल कानूनी समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और नैतिक मूल्यों के क्षरण से जुड़ा हुआ है। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि केवल चुनावी कानूनों में संशोधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मतदाता चेतना, राजनीतिक दलों की आंतरिक लोकतांत्रिक संस्कृति, सशक्त निर्वाचन आयोग और सक्रिय नागरिक समाज की समान रूप से आवश्यकता है। अंततः यह शोध भविष्य में चुनावी सुधारों हेतु नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करता है, जिससे भारतीय लोकतंत्र की नैतिक आधारशिला को पुनः सुदृढ़ किया जा सके।
प्रमुख शब्द- चुनावी नैतिकता, भारतीय लोकतंत्र, चुनावी सुधार, राजनीति का अपराधीकरण, धनबल और बाहुबल, निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दल, मतदाता चेतना, मीडिया और चुनाव, लोकतांत्रिक मूल्य

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Published

30-11-2025

How to Cite

डॉ0 अरविंन्द कुमार शुक्ल. (2025). भारत में चुनावी नैतिकता का ह्रासः कारण, परिणाम एवं समाधान. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 4(11), 104–111. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/1056

Issue

Section

Research Paper

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