महादेवी वर्मा की रचनाओं में नारी चेतना
Abstract
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री ही नहीं, बल्कि स्त्री चेतना की प्रबल स्वर बनकर उभरी हैं। उन्होंने नारी जीवन की पीड़ा, संघर्ष, आत्मबल, संवेदना तथा उसकी स्वतंत्र पहचान को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया। यह शोध-पत्र महादेवी वर्मा की कविताओं, निबंधों और संस्मरणों के माध्यम से उनके स्त्री-विमर्श को रेखांकित करता है। नारी को केवल सहानुभूति की दृष्टि से नहीं बल्कि शक्ति, स्वाभिमान और आत्म-निर्भरता के प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह शोध नारी चेतना की अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करता है, जिसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक तथा दार्शनिक पक्ष सम्मिलित हैं।
मुख्य शब्द- महादेवी वर्मा, नारी चेतना, स्त्री-विमर्श, आत्मनिर्भरता, छायावाद, हिंदी कविता, नारीवाद, सामाजिक संघर्ष, संवेदनशीलता, स्त्री अस्मिता
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