हिन्दी कथा साहित्य में स्त्री विमर्श

Authors

  • डा0 प्रियंका रानी

Abstract

हिंदी कथा साहित्य में स्त्री विमर्श का उदय एक सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवर्तन का परिणाम है, जो महिलाओं की स्थिति, अधिकार और अस्तित्व को केंद्र में लाता है। यह शोधपत्र हिंदी कथाओं के माध्यम से स्त्री चेतना, संघर्ष, आत्माभिव्यक्ति और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ उनके विद्रोह की पड़ताल करता है। प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, मन्नू भंडारी, कृष्णा सोबती, मैत्रेयी पुष्पा, प्रभा खेतान, मृदुला गर्ग और अन्य प्रमुख लेखकों की रचनाओं में स्त्री विषयक दृष्टिकोण का समग्र विश्लेषण इस शोध में किया गया है। शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कैसे हिंदी कथा साहित्य ने स्त्री के यथार्थ को स्वर दिया और भारतीय समाज में स्त्री की नई पहचान की रचना की।
प्रमुख शब्द- स्त्री विमर्श, हिंदी कथा साहित्य, नारी चेतना, सामाजिक असमानता, स्त्री स्वतंत्रता, स्त्री अस्मिता, पुरुषसत्तात्मक व्यवस्था, आत्माभिव्यक्ति, यथार्थवाद।

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Published

31-03-2022

How to Cite

डा0 प्रियंका रानी. (2022). हिन्दी कथा साहित्य में स्त्री विमर्श. Ldealistic Journal of Advanced Research in Progressive Spectrums (IJARPS) eISSN– 2583-6986, 1(03), 8–16. Retrieved from https://journal.ijarps.org/index.php/IJARPS/article/view/711

Issue

Section

Research Paper

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