हिंदी साहित्य और लोककथाएँ
Abstract
हिंदी साहित्य का स्वरूप विविधतापूर्ण और बहुआयामी है, जिसमें लोककथाओं का अद्वितीय और महत्वपूर्ण स्थान है। लोककथाएँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक, और नैतिक चेतना की अभिव्यक्ति भी हैं। ये कथाएँ जीवन के मूल्यों, परंपराओं, और आस्थाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी संचारित करती हैं और जनमानस में सांस्कृतिक पहचान की भावना को मजबूत करती हैं। हिंदी साहित्य में लोककथाओं की उपस्थिति न केवल प्राचीन और मध्यकालीन रचनाओं में दिखाई देती है, बल्कि आधुनिक साहित्य में भी इनका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह शोध पत्र हिंदी साहित्य में लोककथाओं की उत्पत्ति, विकास, संरचना, और उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका का विस्तार से विश्लेषण करता है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि लोककथाएँ किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित न होकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं, और हिंदी साहित्य के विकास में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस शोध में हिंदी साहित्य और लोककथाओं के अंतर्संबंधों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है, जिससे साहित्यिक अध्ययन और सांस्कृतिक शोध के नए दृष्टिकोण विकसित हो सकते हैं।
कीवर्ड्स - हिंदी साहित्य, लोककथाएँ, सांस्कृतिक मूल्य, सामाजिक संरचना, मौखिक परंपरा, नैतिक शिक्षा, लोक साहित्य।
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